Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.46: हे राजन! दूसरों के धन और मित्र भी नष्ट हो जाते हैं; अतः तुम बुद्धिपूर्वक विचार करो और देखो कि तुम्हें भी अन्य लोगों के समान ही कष्ट हो रहे हैं ॥ 46॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! दूसरों के धन और मित्र भी नष्ट हो जाते हैं; अतः तुम बुद्धिपूर्वक विचार करो और देखो कि तुम्हें भी अन्य लोगों के समान ही कष्ट हो रहे हैं ॥ 46॥
O King! The wealth and friends of others too are destroyed; therefore, you should think wisely and see that you too are facing the same problems as other people. ॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥