श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.104.43 
पश्य तेषां कृपणतां पश्य तेषामबुद्धिताम्।
अध्रुवे जीविते मोहादर्थदृष्टिमुपाश्रिता:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उनकी दरिद्रता देखो और उनकी मूर्खता देखो, जो इस क्षणभंगुर जीवन के मोह से धन पर ही दृष्टि गड़ाए रहते हैं ॥ 43॥
 
See their poverty and see their foolishness, who, out of attachment to this temporary life, keep their eyes fixed on wealth. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)