Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.42: कुछ लोग ऐसे होते हैं जो धन के लोभ में ही अपने प्राण गँवा देते हैं। ऐसे लोग धन के अतिरिक्त जीवन का कोई अन्य उद्देश्य नहीं समझते ॥42॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जीवितं संत्यजन्त्येके धनलोभपरा जना:।
न जीवितार्थं मन्यन्ते पुरुषा हि धनादृते॥ ४२॥
अनुवाद
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो धन के लोभ में ही अपने प्राण गँवा देते हैं। ऐसे लोग धन के अतिरिक्त जीवन का कोई अन्य उद्देश्य नहीं समझते ॥42॥
There are some people who lose their lives because of their greed for money. Such people do not understand any other purpose of life except money. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥