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श्लोक  12.104.31 
अनर्हानपि चैवान्यान्मन्यते श्रीमतो जनान्।
एतस्मात् कारणादेतद् दु:खं भूयोऽनुवर्तते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वह दूसरे धनवानों को धन के अयोग्य समझता है। इसीलिए ईर्ष्या और दुःख सदैव उसका पीछा करते रहते हैं। 31.
 
He considers other rich people unworthy of wealth. That is why this jealousy and sadness always follows him. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)