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mahabharat 12.104.27: ऋषि बोले - "हे कोसलराज! जब मनुष्य सत्य के प्रति आश्वस्त हो जाता है, तब उसे भूत या भविष्य की किसी भी बात का शोक नहीं होता। अतः तुम भी इसी प्रकार सब वस्तुओं के विषय में शोक से मुक्त हो जाओ॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.104.27 
मुनिरुवाच
अनागतमतीतं च याथातथ्यविनिश्चयात्।
नानुशोचेत कौसल्य सर्वार्थेषु तथा भव॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले - "हे कोसलराज! जब मनुष्य सत्य के प्रति आश्वस्त हो जाता है, तब उसे भूत या भविष्य की किसी भी बात का शोक नहीं होता। अतः तुम भी इसी प्रकार सब वस्तुओं के विषय में शोक से मुक्त हो जाओ॥ 27॥
 
The sage said, "O Prince of Kosala! When a man is convinced of the truth, he does not grieve for any thing of the past or future. Therefore, you too should become free from grief in the same way in respect of all things.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)