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mahabharat 12.104.22: जो कुछ भविष्य में प्राप्त होने वाला है, उसे 'मेरा नहीं है' ऐसा समझो और जो प्राप्त होकर नष्ट हो गया है, उसे भी 'मेरा नहीं था' ऐसा समझो। जो 'भाग्य ही सबसे बलवान है' ऐसा मानते हैं, वे विद्वान् पुरुष हैं और वे सत्पुरुषों के आश्रय कहे गए हैं।॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.104.22 
अनागतं यन्न ममेति विद्या-
दतिक्रान्तं यन्न ममेति विद्यात्।
दिष्टं बलीय इति मन्यमाना-
स्ते पण्डितास्तत्सतां स्थानमाहु:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो कुछ भविष्य में प्राप्त होने वाला है, उसे 'मेरा नहीं है' ऐसा समझो और जो प्राप्त होकर नष्ट हो गया है, उसे भी 'मेरा नहीं था' ऐसा समझो। जो 'भाग्य ही सबसे बलवान है' ऐसा मानते हैं, वे विद्वान् पुरुष हैं और वे सत्पुरुषों के आश्रय कहे गए हैं।॥ 22॥
 
Whatever is going to be obtained in the future, consider it as 'it is not mine' and even about that which has been obtained and destroyed, consider it as 'it was not mine'. Those who believe that 'destiny is the strongest' are learned people and they are said to be the refuge of good men.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)