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mahabharat 12.104.17: राजा! बताओ, आज तुम्हारे पिता कहाँ हैं? तुम्हारे दादाजी कहाँ चले गए हैं? आज न तो तुम उन्हें देख सकते हो और न ही वे तुम्हें देख सकते हैं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.104.17 
क्व नु तेऽद्य पिता राजन् क्व नु तेऽद्य पितामह:।
न त्वं पश्यसि तानद्य न त्वां पश्यन्ति तेऽपि च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा! बताओ, आज तुम्हारे पिता कहाँ हैं? तुम्हारे दादाजी कहाँ चले गए हैं? आज न तो तुम उन्हें देख सकते हो और न ही वे तुम्हें देख सकते हैं॥17॥
 
King! Tell me, where is your father today? Where has your grandfather gone now? Today neither you see him nor he can see you.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)