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mahabharat 12.104.1: युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! यदि कोई राजा पुण्यात्मा हो और बहुत प्रयत्न करने पर भी उसे धन प्राप्त न हो, ऐसी स्थिति में यदि उसके मंत्री उसे कष्ट दें और वह कोष और सेना से रहित हो जाए, तो सुख चाहने वाला राजा कैसे जीवन निर्वाह करे ?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.104.1 
युधिष्ठिर उवाच
धार्मिकोऽर्थानसम्प्राप्य राजामात्यै: प्रबाधित:।
च्युत: कोशाच्च दण्डाच्च सुखमिच्छन् कथं चरेत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - "पितामह! यदि कोई राजा पुण्यात्मा हो और बहुत प्रयत्न करने पर भी उसे धन प्राप्त न हो, ऐसी स्थिति में यदि उसके मंत्री उसे कष्ट दें और वह कोष और सेना से रहित हो जाए, तो सुख चाहने वाला राजा कैसे जीवन निर्वाह करे ?॥1॥
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! If a king is virtuous and despite all his efforts he is unable to obtain wealth, if in that condition his ministers trouble him and he is left without treasury and army, then how should a king who desires happiness manage?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)