Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.9: यदि भीतर से उस पर विश्वास न भी हो, तो भी बाहर से विश्वासपात्र बनकर शत्रु की सेवा करनी चाहिए। उससे सदैव मधुर वचन बोलना चाहिए और उसके साथ कभी अप्रिय व्यवहार नहीं करना चाहिए।॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि भीतर से उस पर विश्वास न भी हो, तो भी बाहर से विश्वासपात्र बनकर शत्रु की सेवा करनी चाहिए। उससे सदैव मधुर वचन बोलना चाहिए और उसके साथ कभी अप्रिय व्यवहार नहीं करना चाहिए।॥9॥
Even if you do not trust him from within, you should serve your enemy by acting like a trustworthy person from outside. Always speak sweet words to him and never behave unpleasantly with him.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥