Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.7: बृहस्पतिजी बोले - हे राजन! किसी भी राजा को कभी भी झगड़े या युद्ध के द्वारा अपने शत्रुओं को परास्त करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। असहिष्णुता या क्षमा का त्याग बालकों या मूर्खों द्वारा अपनाया जाने वाला मार्ग है। | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बृहस्पतिरुवाच
न जातु कलहेनेच्छेन्नियन्तुमपकारिण:।
बालैरासेवितं ह्येतद् यदमर्षो यदक्षमा॥ ७॥
अनुवाद
बृहस्पतिजी बोले - हे राजन! किसी भी राजा को कभी भी झगड़े या युद्ध के द्वारा अपने शत्रुओं को परास्त करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। असहिष्णुता या क्षमा का त्याग बालकों या मूर्खों द्वारा अपनाया जाने वाला मार्ग है।
Brihaspatiji said - O King! No king should ever wish to subjugate his enemies through quarrel or war. Intolerance or giving up forgiveness is a path followed by children or fools. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥