Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.50: यदि कोई व्यक्ति अपने मित्र को दुःखी देखकर दुःखी हो और मित्र के सुखी होने पर सुखी हो, तो ये मित्र के लक्षण हैं। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति किसी को दुःखी देखकर सुखी हो और किसी को सुखी देखकर दुःखी हो, तो समझना चाहिए कि ये शत्रु के लक्षण हैं ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई व्यक्ति अपने मित्र को दुःखी देखकर दुःखी हो और मित्र के सुखी होने पर सुखी हो, तो ये मित्र के लक्षण हैं। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति किसी को दुःखी देखकर सुखी हो और किसी को सुखी देखकर दुःखी हो, तो समझना चाहिए कि ये शत्रु के लक्षण हैं ॥50॥
If a person feels pain when his friend is in pain and feels happy when his friend is happy, then these are the signs of a friend. On the contrary, if a person feels happy on seeing someone in pain and feels pain on seeing someone happy, then it should be understood that these are the signs of an enemy. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥