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mahabharat 12.103.38-39: जब हाथी, घोड़े, रथों से युक्त, बहुत से पैदल सैनिकों और यन्त्रों से सुसज्जित, छः पंखों वाली विशाल सेना अपने स्वामी के प्रति समर्पित हो, और जब ऐसा प्रतीत हो कि राजा शत्रु की अपेक्षा अनेक प्रकार से आगे बढ़ रहा है, तब राजा को चाहिए कि वह अन्य किसी बात पर विचार न करते हुए, लुटेरों और लूटने वालों पर खुलेआम आक्रमण करना आरम्भ कर दे। 38-39।   |   mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  12.103.38-39 
यदा स्यान्महती सेना हयनागरथाकुला।
पदातियन्त्रबहुला अनुरक्ता षडङ्गिनी॥ ३८॥
यदा बहुविधां वृद्धिं मन्येत प्रतिलोमत:।
तदा विवृत्य प्रहरेद् दस्यूनामविचारयन्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब हाथी, घोड़े, रथों से युक्त, बहुत से पैदल सैनिकों और यन्त्रों से सुसज्जित, छः पंखों वाली विशाल सेना अपने स्वामी के प्रति समर्पित हो, और जब ऐसा प्रतीत हो कि राजा शत्रु की अपेक्षा अनेक प्रकार से आगे बढ़ रहा है, तब राजा को चाहिए कि वह अन्य किसी बात पर विचार न करते हुए, लुटेरों और लूटने वालों पर खुलेआम आक्रमण करना आरम्भ कर दे। 38-39।
 
When a large six-winged army, replete with elephants, horses, chariots, and equipped with numerous infantry and machinery, is devoted to its lord, and when it appears that the king is advancing in many ways compared to the enemy, then the king, without thinking of anything else, should openly begin attacking the robbers and looters. 38-39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)