Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.34: लोग कोमल स्वभाव वाले राजा का भी अपमान करते हैं और अत्यन्त कठोर स्वभाव वाले राजा से भी रुष्ट हो जाते हैं; इसलिए तुम्हें न तो कठोर होना चाहिए और न कोमल होना चाहिए। समय-समय पर कठोर भी बनना चाहिए और कोमल भी बनना चाहिए ॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृदुमप्यवमन्यन्ते तीक्ष्णादुद्विजते जन:।
मा तीक्ष्णो मा मृदुर्भूस्त्वं तीक्ष्णो भव मृदुर्भव॥ ३४॥
अनुवाद
लोग कोमल स्वभाव वाले राजा का भी अपमान करते हैं और अत्यन्त कठोर स्वभाव वाले राजा से भी रुष्ट हो जाते हैं; इसलिए तुम्हें न तो कठोर होना चाहिए और न कोमल होना चाहिए। समय-समय पर कठोर भी बनना चाहिए और कोमल भी बनना चाहिए ॥ 34॥
People insult a king with a mild nature and get upset even with a very harsh nature; therefore, you should neither be harsh nor gentle. Be harsh and also gentle from time to time. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥