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स्थानानि शङ्कितानां च नित्यमेव विवर्जयेत्।
न च तेष्वाश्वसेद् राजा जाग्रतीह निराकृता:॥ ३१॥
अनुवाद
राजा को चाहिए कि जिन शत्रुओं के मन में शंका उत्पन्न हो गई हो, उनके पास रहना या जाना छोड़ दे। राजा को उन पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए; क्योंकि इस संसार में जिन शत्रुओं ने उसका अपमान किया है या उसे हानि पहुँचाई है, वे बदला लेने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं ॥31॥
The king should stop living or visiting places near those enemies in whose minds suspicions have arisen. The king should never trust them; because the enemies who have been insulted or harmed by him in this world are always ready to take revenge. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥