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mahabharat 12.103.28: राजा को चाहिए कि वह पहले शत्रु के विरुद्ध भेद-नीति का प्रयोग करे, तत्पश्चात् उचित अवसर आने पर भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न शत्रुओं के विरुद्ध चुपचाप दण्ड-नीति का प्रयोग करे ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.103.28 
भेदं च प्रथमं युञ्‍ज्‍यात् तूष्णीं दण्डं तथैव च।
काले प्रयोजयेद् राजा तस्मिंस्तस्मिंस्तदा तदा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह पहले शत्रु के विरुद्ध भेद-नीति का प्रयोग करे, तत्पश्चात् उचित अवसर आने पर भिन्न-भिन्न समय पर भिन्न-भिन्न शत्रुओं के विरुद्ध चुपचाप दण्ड-नीति का प्रयोग करे ॥28॥
 
The king should first use discrimination against the enemy. After that, when the appropriate opportunity arises, he should silently use the policy of punishment against different enemies at different times. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)