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mahabharat 12.103.26: राजा को जो गुप्त कार्य अकेले ही करने में समर्थ हो, उसे अवश्य करना चाहिए, क्योंकि मंत्रीगण कभी-कभी गुप्त बातें प्रकट कर देते हैं और कभी-कभी वे एक-दूसरे को बता देते हैं ॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.103.26 
यदैवैकेन शक्येत गुह्यं कर्तुं तदाचरेत्।
यच्छन्ति सचिवा गुह्यं मिथो विश्रावयन्त्यपि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजा को जो गुप्त कार्य अकेले ही करने में समर्थ हो, उसे अवश्य करना चाहिए, क्योंकि मंत्रीगण कभी-कभी गुप्त बातें प्रकट कर देते हैं और कभी-कभी वे एक-दूसरे को बता देते हैं ॥ 26॥
 
The king must do any secret work which he can do alone, because the ministers sometimes reveal secret matters and otherwise they tell it to each other.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)