Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.103.22: श्रेष्ठ पुरुषों से परामर्श लेकर सदैव अपनी शक्ति बढ़ाते रहना चाहिए। जब तक उपयुक्त अवसर न आ जाए, तब तक अपने मित्रों की संख्या बढ़ानी चाहिए और शत्रुओं को कष्ट नहीं देना चाहिए; किन्तु अवसर आने पर शत्रु पर आक्रमण करने से नहीं चूकना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.103: शत्रुको वशमें करनेके लिये राजाको किस नीतिसे काम लेना चाहिये और दुष्टोंको कैसे पहचानना चाहिये—इसके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ओजश्च जनयेदेव संगृह्णन् साधुसम्मतम्।
अकाले साधयेन्मित्रं न च प्राप्ते प्रपीडयेत्॥ २२॥
अनुवाद
श्रेष्ठ पुरुषों से परामर्श लेकर सदैव अपनी शक्ति बढ़ाते रहना चाहिए। जब तक उपयुक्त अवसर न आ जाए, तब तक अपने मित्रों की संख्या बढ़ानी चाहिए और शत्रुओं को कष्ट नहीं देना चाहिए; किन्तु अवसर आने पर शत्रु पर आक्रमण करने से नहीं चूकना चाहिए।
Taking advice from the best men, one should always keep increasing his strength. Until the opportune moment arrives, one should increase the number of his friends and not trouble his enemies; but when the opportunity arrives, one should not fail to attack the enemy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥