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आदिमध्यावसानज्ञ: प्रच्छन्नं च विधारयेत्।
बलानि दूषयेदस्य जानन्नेव प्रमाणत:॥ १६॥
अनुवाद
शत्रु के राज्य का आदि, मध्य और अन्त जानकर राजा को अपने मन्त्रियों के साथ गुप्त रूप से बैठकर अपने कर्तव्य का निश्चय करना चाहिए। शत्रु की सेना का आकार अच्छी तरह जानकर उसमें विभाजन उत्पन्न करने का प्रयत्न करना चाहिए ॥16॥
After knowing the beginning, middle and end of the enemy's kingdom, the king should sit together with his ministers in secret and decide on his duty. After knowing the size of the enemy's army well, he should try to create divisions in it. ॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥