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mahabharat 12.102.9: जहाँ शंखों की गम्भीर ध्वनि और युद्ध के तुरही की तीव्र ध्वनि फैल रही हो, तथा युद्ध करने की इच्छा रखने वाले सैनिकों के लिए सब अनुकूल हो, वहाँ यह भी भावी विजय का सूचक शुभ संकेत कहा गया है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.102.9 
गम्भीरशब्दाश्च महास्वनाश्च
शङ्खाश्च भेर्यश्च नदन्ति यत्र।
युयुत्सवश्चाप्रतीपा भवन्ति
जयस्यैतद् भाविनो रूपमाहु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जहाँ शंखों की गम्भीर ध्वनि और युद्ध के तुरही की तीव्र ध्वनि फैल रही हो, तथा युद्ध करने की इच्छा रखने वाले सैनिकों के लिए सब अनुकूल हो, वहाँ यह भी भावी विजय का सूचक शुभ संकेत कहा गया है॥9॥
 
Where the deep sound of conches and the loud sound of war trumpets is spreading, and the soldiers wishing to fight are all favorable, then this is also said to be an auspicious sign indicating future victory.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)