Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.102.6-7: यदि किसी सेना के रण-प्रयास के समय सैनिकों के पीछे से मंद-मंद वायु बहती रहे, सामने इन्द्रधनुष दिखाई दे, बादलों की छाया बार-बार आती रहे, सूर्य की किरणें फैलती रहें तथा गीदड़, गिद्ध और कौवे भी अनुकूल दिशा में आते रहें, तो निश्चय ही वह सेना उत्तम सफलता प्राप्त करती है ॥6-7॥ | mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि किसी सेना के रण-प्रयास के समय सैनिकों के पीछे से मंद-मंद वायु बहती रहे, सामने इन्द्रधनुष दिखाई दे, बादलों की छाया बार-बार आती रहे, सूर्य की किरणें फैलती रहें तथा गीदड़, गिद्ध और कौवे भी अनुकूल दिशा में आते रहें, तो निश्चय ही वह सेना उत्तम सफलता प्राप्त करती है ॥6-7॥
If, during the battle march of an army, a gentle breeze blows from behind the soldiers, a rainbow appears in front, the shadow of clouds keeps appearing again and again, the sun's rays keep spreading, and jackals, vultures and crows also come in the favourable direction, then certainly that army achieves the best success. ॥ 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥