Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.102.5: हे भरतपुत्र! जिस सेना के योद्धा और वाहन हृदय में प्रसन्न और उत्साहित रहते हैं, वह निश्चित रूप से उत्तम विजय प्राप्त करती है॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.102.5 
उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत।
यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां परो जय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! जिस सेना के योद्धा और वाहन हृदय में प्रसन्न और उत्साहित रहते हैं, वह निश्चित रूप से उत्तम विजय प्राप्त करती है॥5॥
 
O son of Bharatana! The army whose warriors and vehicles are happy and enthusiastic in their hearts is sure to achieve the best victory. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)