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mahabharat 12.102.40: भरतनंदन! सभी प्राणी उस पर विश्वास करने लगते हैं। एक बार वह विश्वासपात्र हो जाए, तो वह सबके निकट रहकर अपनी इच्छानुसार सम्पूर्ण राष्ट्र का शोषण कर सकता है। ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.102.40 
विश्वासं चात्र गच्छन्ति सर्वभूतानि भारत।
विश्वस्त: शक्यते भोक्तुं यथाकाममुपस्थित:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! सभी प्राणी उस पर विश्वास करने लगते हैं। एक बार वह विश्वासपात्र हो जाए, तो वह सबके निकट रहकर अपनी इच्छानुसार सम्पूर्ण राष्ट्र का शोषण कर सकता है। ॥40॥
 
Bharatanandan! All beings start trusting him. Once he is trustworthy, he can stay close to everyone and exploit the entire nation as per his wish. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)