Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.102.36-37: ओह! हर कोई अपनी जान बचाना चाहता है, इसलिए ऐसे व्यक्ति को मारना उचित नहीं है। युद्ध में पीठ न दिखाने वाले पुण्यात्मा पुरुष इस संसार में बहुत दुर्लभ हैं। मेरे सैनिकों ने, जिन्होंने युद्ध में इस महान योद्धा को मार डाला, मेरे साथ बहुत बुरा काम किया है। शत्रु से इस प्रकार शब्दों द्वारा खेद प्रकट करने के बाद, राजा को एकांत में जाकर अपने उन वीर सैनिकों की प्रशंसा करनी चाहिए, जिन्होंने शत्रु के प्रमुख योद्धाओं को मार डाला। | mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ओह! हर कोई अपनी जान बचाना चाहता है, इसलिए ऐसे व्यक्ति को मारना उचित नहीं है। युद्ध में पीठ न दिखाने वाले पुण्यात्मा पुरुष इस संसार में बहुत दुर्लभ हैं। मेरे सैनिकों ने, जिन्होंने युद्ध में इस महान योद्धा को मार डाला, मेरे साथ बहुत बुरा काम किया है। शत्रु से इस प्रकार शब्दों द्वारा खेद प्रकट करने के बाद, राजा को एकांत में जाकर अपने उन वीर सैनिकों की प्रशंसा करनी चाहिए, जिन्होंने शत्रु के प्रमुख योद्धाओं को मार डाला।
‘Oh! Everyone wants to save their lives; therefore, it is not proper to kill such a person. Virtuous men who do not turn their back in battle are very rare in this world. My soldiers who killed this great warrior in battle have done me a very unpleasant deed. After expressing regret in this manner to the enemy through words, the king should go into solitude and praise those brave soldiers of his who killed the main warriors of the enemy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥