Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.102.35: शत्रु से यह कहना चाहिए - 'अरे! मुझे यह अच्छा नहीं लगता कि मेरे सैनिकों ने इस युद्ध में इतने वीरों को मार डाला; परन्तु मैं क्या करूँ? बार-बार कहने पर भी वे मेरी बात नहीं सुनते।' | mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे प्रियं यन्निहता: संग्रामे मामकैर्नरै:।
न च कुर्वन्ति मे वाक्यमुच्यमाना: पुन: पुन:॥ ३५॥
अनुवाद
शत्रु से यह कहना चाहिए - 'अरे! मुझे यह अच्छा नहीं लगता कि मेरे सैनिकों ने इस युद्ध में इतने वीरों को मार डाला; परन्तु मैं क्या करूँ? बार-बार कहने पर भी वे मेरी बात नहीं सुनते।'
He should say this to the enemy - 'Oh! I do not like the fact that my soldiers have killed so many brave men in this war; but what can I do? Even after telling them repeatedly, they do not listen to me. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥