Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.102.26: उन देशवासियों के प्रति कठोर होने के साथ-साथ मधुर और सान्त्वनादायक वचनों का भी बार-बार प्रयोग करना चाहिए; अन्यथा वे कठोर वचनों से ही व्याकुल होकर सब ओर से विमुख होकर शत्रुओं से जा मिलते हैं॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन देशवासियों के प्रति कठोर होने के साथ-साथ मधुर और सान्त्वनादायक वचनों का भी बार-बार प्रयोग करना चाहिए; अन्यथा वे कठोर वचनों से ही व्याकुल होकर सब ओर से विमुख होकर शत्रुओं से जा मिलते हैं॥ 26॥
Along with being harsh, sweet and comforting words should be used repeatedly towards those countrymen; otherwise, being troubled by mere harsh words, they turn away from all sides and join the enemies.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥