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mahabharat 12.102.17: भरतनंदन! युद्ध से प्राप्त विजय तुच्छ मानी जाती है। युद्ध में विजय अचानक प्राप्त होती है या ईश्वर की इच्छा से, यह विचारणीय विषय है। इसका पहले से निर्णय नहीं किया जा सकता॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.102.17 
जघन्य एष विजयो यद् युद्धं नाम भारत।
यादृच्छिको युधि जयो दैवो वेति विचारणम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! युद्ध से प्राप्त विजय तुच्छ मानी जाती है। युद्ध में विजय अचानक प्राप्त होती है या ईश्वर की इच्छा से, यह विचारणीय विषय है। इसका पहले से निर्णय नहीं किया जा सकता॥17॥
 
Bharatanandan! Victory obtained through war is considered inferior. Whether victory in war is achieved suddenly or by the will of God is a matter worth considering. It cannot be decided beforehand.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)