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mahabharat 12.102.16: युधिष्ठिर! चार दलों वाली विशाल सेना एकत्रित करने के बाद भी, तुम्हें पहले कूटनीतिक युक्तियों से शत्रु के साथ संधि करने का प्रयास करना चाहिए। यदि वह सफल न हो, तो युद्ध के लिए प्रयत्न करना उचित है।   |   mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.102.16 
सम्भृत्य महतीं सेनां चतुरङ्गां युधिष्ठिर।
साम्नैव वर्तये: पूर्वं प्रयतेथास्ततो युधि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! चार दलों वाली विशाल सेना एकत्रित करने के बाद भी, तुम्हें पहले कूटनीतिक युक्तियों से शत्रु के साथ संधि करने का प्रयास करना चाहिए। यदि वह सफल न हो, तो युद्ध के लिए प्रयत्न करना उचित है।
 
Yudhishthira! Even after gathering a huge army of four divisions, you should first try to enter into a treaty with the enemy through diplomatic tactics. If that does not succeed, then it is appropriate to try for a war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)