Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.102.14: जब योद्धाओं के हृदय को प्रसन्न करने वाली ध्वनियाँ, स्पर्श और गंध चारों ओर फैल रही हों और उनके भीतर धैर्य प्रवाहित हो रहा हो, तब उसे विजय का द्वार माना जाता है ॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब योद्धाओं के हृदय को प्रसन्न करने वाली ध्वनियाँ, स्पर्श और गंध चारों ओर फैल रही हों और उनके भीतर धैर्य प्रवाहित हो रहा हो, तब उसे विजय का द्वार माना जाता है ॥14॥
When the sounds, touch and smells that are pleasing to the warriors' hearts are spreading all around and patience is flowing within them, then it is considered the door to victory. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥