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mahabharat 12.102.11: जब हंस, सारस, शतपत्र और नीलकंठ आदि पक्षी शुभ ध्वनि करते हैं और सैनिक हर्ष और उत्साह से भरे हुए दिखाई देते हैं, तो इसे भी भावी विजय का शुभ संकेत कहा गया है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 102: विजयसूचक शुभाशुभ लक्षणोंका तथा उत्साही और बलवान् सैनिकोंका वर्णन एवं राजाको युद्धसम्बन्धी नीतिका निर्देश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.102.11 
माङ्गल्यशब्दान् शकुना वदन्ति
हंसा: क्रौञ्चा: शतपत्राश्च चाषा:।
हृष्टा योधा: सत्त्ववन्तो भवन्ति
जयस्यैतद् भाविनो रूपमाहु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब हंस, सारस, शतपत्र और नीलकंठ आदि पक्षी शुभ ध्वनि करते हैं और सैनिक हर्ष और उत्साह से भरे हुए दिखाई देते हैं, तो इसे भी भावी विजय का शुभ संकेत कहा गया है ॥11॥
 
When birds like swan, crane, shata-patra and neelkanth make auspicious sounds and the soldiers appear full of joy and enthusiasm, then this is also said to be an auspicious sign of future victory. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)