Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.101.16-18: जिनके केशों के सिरे पीले और बिखरे हुए हैं, जिनकी पसलियाँ, ठोड़ी और मुख लंबे और मोटे हैं, जिनके कंधे ऊँचे हैं, जिनकी गर्दन मोटी और पिंडलियाँ भारी हैं, जो देखने में भयंकर लगते हैं, जो सुग्रीव जाति के घोड़ों के समान हैं और गरुड़ पक्षी के समान अहंकारी स्वभाव वाले हैं, जिनके सिर गोल और मुख बड़े हैं, जिनका मुख बिल्ली के समान है और जिनकी वाणी कठोर है, वे बड़े क्रोधी और युद्ध में गर्जना करते हुए घूमते हैं। उन्हें धर्म का ज्ञान नहीं है। वे गर्व से भरे हुए भयंकर रूप वाले दिखाई देते हैं। उनका दर्शन ही बड़ा भयानक है॥16-18॥   |   mahabharat अध्याय 12.101: भिन्न-भिन्न देशके योद्धाओंके स्वभाव, रूप, बल, आचरण और लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 101: भिन्न-भिन्न देशके योद्धाओंके स्वभाव, रूप, बल, आचरण और लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 16-18
 
 
श्लोक  12.101.16-18 
दीप्तस्फुटितकेशान्ता: स्थूलपार्श्वहनूमुखा:।
उन्नतांसा: पृथुग्रीवा विकटा: स्थूलपिण्डिका:॥ १६॥
उद्धता इव सुग्रीवा विनताविहगा इव।
पिण्डशीर्षातिवक्त्राश्च वृषदंशमुखास्तथा॥ १७॥
उग्रस्वरा मन्युमन्तो युद्धेष्वारावसारिण:।
अधर्मज्ञावलिप्ताश्च घोरा रौद्रप्रदर्शना:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जिनके केशों के सिरे पीले और बिखरे हुए हैं, जिनकी पसलियाँ, ठोड़ी और मुख लंबे और मोटे हैं, जिनके कंधे ऊँचे हैं, जिनकी गर्दन मोटी और पिंडलियाँ भारी हैं, जो देखने में भयंकर लगते हैं, जो सुग्रीव जाति के घोड़ों के समान हैं और गरुड़ पक्षी के समान अहंकारी स्वभाव वाले हैं, जिनके सिर गोल और मुख बड़े हैं, जिनका मुख बिल्ली के समान है और जिनकी वाणी कठोर है, वे बड़े क्रोधी और युद्ध में गर्जना करते हुए घूमते हैं। उन्हें धर्म का ज्ञान नहीं है। वे गर्व से भरे हुए भयंकर रूप वाले दिखाई देते हैं। उनका दर्शन ही बड़ा भयानक है॥16-18॥
 
Those whose hair tips are yellow and scattered, whose ribs, chin and mouth are long and thick, whose shoulders are high, whose neck is thick and whose calves are heavy, who appear fierce to look at, who are like the horses of the Sugreeva species and who have an arrogant nature like the Garuda bird, whose heads are round and faces are large, who have a face like that of a cat and whose voice is harsh, they are very short-tempered and roam about roaring in battle. They do not have the knowledge of Dharma. They appear with a fierce appearance, full of pride. Their very sight is very frightening.॥16-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)