श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.100.41 
ते वयं स्वर्गमिच्छन्त: संग्रामे त्यक्तजीविता:।
जयन्तो वध्यमाना वा प्राप्नुयाम च सद्‍गतिम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम लोग निश्चय करो कि हम लोग प्राणों की आसक्ति न रखते हुए, मन में स्वर्ग की इच्छा रखते हुए युद्ध करेंगे। या तो हमें विजय प्राप्त होगी, या फिर युद्ध में मारे जाकर मोक्ष प्राप्त करेंगे। ॥41॥
 
Therefore, you people should decide that we will fight in the war without any attachment to our lives, keeping the desire for heaven in mind. Either we will achieve victory or we will get killed in the war and attain salvation. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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