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mahabharat 12.100.34: क्योंकि ऐसे कायर पुरुष न तो शत्रुओं को तितर-बितर कर सकते हैं और न ही भीषण युद्ध में उन्हें मार सकते हैं। केवल एक वीर पुरुष ही अपनी और अपने सैनिकों की रक्षा करते हुए शत्रुओं का वध कर सकता है।   |   mahabharat अध्याय 12.100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.100.34 
न संनिपाते प्रदरं वधं वा कुर्युरीदृशा:।
आत्मानं च स्वपक्षं च पालयन् हन्ति संयुगे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि ऐसे कायर पुरुष न तो शत्रुओं को तितर-बितर कर सकते हैं और न ही भीषण युद्ध में उन्हें मार सकते हैं। केवल एक वीर पुरुष ही अपनी और अपने सैनिकों की रक्षा करते हुए शत्रुओं का वध कर सकता है।
 
Because such cowardly men can neither disperse the enemies nor kill them in a fierce battle. Only a brave man can kill the enemies while protecting himself and his soldiers. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)