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mahabharat 12.100.23: जो भूमि अत्यंत दुर्गम हो, जिसमें घास प्रचुर मात्रा में हो, जो बांस और बेंत से भरी हो तथा जो पहाड़ों और बगीचों से युक्त हो, वह पैदल सेना के लिए उपयुक्त है।   |   mahabharat अध्याय 12.100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.100.23 
बहुदुर्गा महाकक्षा वेणुवेत्रसमाकुला।
पदातीनां क्षमा भूमि: पर्वतोपवनानि च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो भूमि अत्यंत दुर्गम हो, जिसमें घास प्रचुर मात्रा में हो, जो बांस और बेंत से भरी हो तथा जो पहाड़ों और बगीचों से युक्त हो, वह पैदल सेना के लिए उपयुक्त है।
 
The land which is very inaccessible, has abundant grass, is full of bamboos and canes and is dotted with mountains and gardens is suitable for infantry. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)