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mahabharat 12.100.14: वन में जंगली पशुओं के समान मनुष्य भी आसानी से नहीं चल सकते; इसलिए विजय की इच्छा रखने वाले राजा अपनी सेनाओं का मार्गदर्शन करने के लिए ऐसे गुप्तचरों को नियुक्त करते हैं॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 100: सैन्यसंचालनकी रीति-नीतिका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.100.14 
न ह्यरण्येन शक्येत गन्तुं मृगगणैरिव।
तस्मात् सेनासु तानेव योजयन्ति जयार्थिन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वन में जंगली पशुओं के समान मनुष्य भी आसानी से नहीं चल सकते; इसलिए विजय की इच्छा रखने वाले राजा अपनी सेनाओं का मार्गदर्शन करने के लिए ऐसे गुप्तचरों को नियुक्त करते हैं॥14॥
 
Like wild animals, men cannot move easily in the jungle; therefore, kings desirous of victory appoint such spies to guide their armies.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)