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mahabharat 12.10.8: युधिष्ठिर! जो लोग हमारे राज्य में बाधा डाल रहे थे या उसे लूट रहे थे, वे सभी अपराधी थे; इसलिए हमने उनका वध कर दिया। उन्हें मारकर तुम धर्म के बल से प्राप्त इस पृथ्वी का भोग करो॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.10.8 
ते सदोषा हतास्माभी राज्यस्य परिपन्थिन:।
तान् हत्वा भुङ्क्ष्व धर्मेण युधिष्ठिर महीमिमाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो लोग हमारे राज्य में बाधा डाल रहे थे या उसे लूट रहे थे, वे सभी अपराधी थे; इसलिए हमने उनका वध कर दिया। उन्हें मारकर तुम धर्म के बल से प्राप्त इस पृथ्वी का भोग करो॥8॥
 
Yudhishthira! Those who were obstructing our kingdom or looting it were all criminals; hence we killed them. After killing them, you should enjoy this earth which was obtained by virtue of Dharma. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)