क्षमानुकम्पा कारुण्यमानृशंस्यं न विद्यते।
क्षात्रमाचरतो मार्गमपि बन्धोस्त्वदन्तरे॥ ३॥
अनुवाद
क्षत्रिय मार्ग पर चलने वाला मनुष्य अपने भाई के प्रति भी क्षमा, दया, करुणा या कोमलता का भाव नहीं रखता; फिर तेरे हृदय में यह सब क्यों है?॥3॥
A man following the path of a Kshatriya does not have any feeling of forgiveness, mercy, compassion or tenderness even towards his brother; then why do you have all this in your heart?॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥