Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.10.27: (यदि अपने शरीर का ही भरण-पोषण करने से सिद्धि प्राप्त हो सकती है, तो) जलचर और स्थावर प्राणियों को भी सिद्धि प्राप्त करनी चाहिए; क्योंकि उन्हें अपना ही भरण-पोषण करना है। उनके पास दूसरा कोई नहीं है जिसका भरण-पोषण वे कर सकें॥27॥ | mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(यदि अपने शरीर का ही भरण-पोषण करने से सिद्धि प्राप्त हो सकती है, तो) जलचर और स्थावर प्राणियों को भी सिद्धि प्राप्त करनी चाहिए; क्योंकि उन्हें अपना ही भरण-पोषण करना है। उनके पास दूसरा कोई नहीं है जिसका भरण-पोषण वे कर सकें॥27॥
(If one can attain siddhi by just providing for one's own body, then) even aquatic creatures and immobile creatures should also attain siddhi; because they have to provide for themselves only. They do not have anyone else whose maintenance they can bear.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥