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mahabharat 12.10.26: यदि दूसरों के कर्मों से प्राप्त होने वाली सफलता हमारे भाग्य में नहीं है, तो सबको कर्म करना ही चाहिए। निष्क्रिय व्यक्ति को कभी सफलता नहीं मिलती॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.10.26 
अथ चेदात्मभाग्येषु नान्येषां सिद्धिमश्नुते।
तस्मात् कर्मैव कर्तव्यं नास्ति सिद्धिरकर्मण:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि दूसरों के कर्मों से प्राप्त होने वाली सफलता हमारे भाग्य में नहीं है, तो सबको कर्म करना ही चाहिए। निष्क्रिय व्यक्ति को कभी सफलता नहीं मिलती॥26॥
 
If the success achieved by the actions of others is not in our destiny, then everyone must do action. An inactive person never gets any success.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)