Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.10.12: हे कुरुपुत्र! जैसे मनुष्य शत्रुओं को मारकर स्वयं को भी मार डालता है, वैसे ही हमारा कर्म भी वैसा ही है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.10.12 
यथा शत्रून् घातयित्वा पुरुष: कुरुनन्दन।
आत्मानं घातयेत् पश्चात् कर्मेदं नस्तथोपमम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! जैसे मनुष्य शत्रुओं को मारकर स्वयं को भी मार डालता है, वैसे ही हमारा कर्म भी वैसा ही है॥12॥
 
O son of Kuru! Just as a man kills his own self after killing his enemies, our action is also similar to that. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)