श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 10: भीमसेनका राजाके लिये संन्यासका विरोध करते हुए अपने कर्तव्यके ही पालनपर जोर देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.10.1 
भीम उवाच
श्रोत्रियस्येव ते राजन् मन्दकस्याविपश्चित:।
अनुवाकहता बुद्धिर्नैषा तत्त्वार्थदर्शिनी॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - राजन ! जिस प्रकार मन्दबुद्धि और अर्थ-ज्ञान से शून्य श्रोता की बुद्धि केवल मन्त्र पढ़ने मात्र से मारी जाती है, उसी प्रकार आपकी बुद्धि भी भौतिक अर्थ को देखने या समझने में समर्थ नहीं है ॥1॥
 
Bhimsen said – King! Just as the intellect of a listener who is dull and void of knowledge of meaning is killed only by reciting mantras, similarly your intellect is also not able to see or understand the material meaning. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)