Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.1.44: हे प्रभु! मैं आपसे सम्पूर्ण कथा यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ; क्योंकि आप अन्तर्यामी विद्वान हैं और संसार की भूत और भविष्य की समस्त घटनाओं को जानने वाले हैं॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.1.44 
श्रोतुमिच्छामि भगवंस्त्वत्त: सर्वं यथातथम्।
भवान् हि सर्वविद् विद्वान् लोके वेद कृताकृतम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं आपसे सम्पूर्ण कथा यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ; क्योंकि आप अन्तर्यामी विद्वान हैं और संसार की भूत और भविष्य की समस्त घटनाओं को जानने वाले हैं॥ 44॥
 
O Lord! I wish to hear the entire story from you in its true form; because you are an omniscient scholar and know all the past and future events in the world. ॥ 44॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कर्णाभिज्ञाने प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कर्णकी पहचानविषयक पहला अध्याय पूरा हुआ॥ १॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)