Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.1.43-44h: हे नारद! युद्ध में पृथ्वी ने कर्ण का चक्र क्यों निगल लिया और मेरे बड़े भाई कर्ण को यह शाप कैसे प्राप्त हुआ? कृपया मुझे यह ठीक-ठीक बताइए। ॥43 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं नु तस्य संग्रामे पृथिवी चक्रमग्रसत्॥ ४३॥
कथं नु शप्तो भ्राता मे तत्त्वं वक्तुमिहार्हसि।
अनुवाद
हे नारद! युद्ध में पृथ्वी ने कर्ण का चक्र क्यों निगल लिया और मेरे बड़े भाई कर्ण को यह शाप कैसे प्राप्त हुआ? कृपया मुझे यह ठीक-ठीक बताइए। ॥43 1/2॥
O Narada! Why did the earth swallow Karna's wheel in the battle and how did my elder brother Karna receive this curse? Please tell me this exactly. ॥ 43 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥