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mahabharat 12.1.4: द्वैपायन व्यास, नारद, महर्षि देवल, देवस्थान, कण्व तथा उनके श्रेष्ठ शिष्य भी वहाँ आये। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.1.4 
द्वैपायनो नारदश्च देवलश्च महानृषि:।
देवस्थानश्च कण्वश्च तेषां शिष्याश्च सत्तमा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
द्वैपायन व्यास, नारद, महर्षि देवल, देवस्थान, कण्व तथा उनके श्रेष्ठ शिष्य भी वहाँ आये। 4॥
 
Dwaipayana Vyas, Narada, Maharishi Deval, Devasthan, Kanva and his best disciples also came there. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)