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mahabharat 12.1.39-40h: कर्ण और अर्जुन की सहायता से मैं देवराज इन्द्र को भी परास्त कर सकता था। जब कौरव सभा में दुष्ट धृतराष्ट्र के पुत्रों ने मुझे बहुत कष्ट पहुँचाया, तब मेरे हृदय में सहसा क्रोध उत्पन्न हुआ; किन्तु कर्ण को देखते ही वह शांत हो गया॥39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  12.1.39-40h 
कर्णार्जुनसहायोऽहं जयेयमपि वासवम्।
सभायां क्लिश्यमानस्य धार्तराष्ट्रैर्दुरात्मभि:॥ ३९॥
सहसोत्पतित: क्रोध: कर्णं दृष्ट्वा प्रशाम्यति।
 
 
अनुवाद
कर्ण और अर्जुन की सहायता से मैं देवराज इन्द्र को भी परास्त कर सकता था। जब कौरव सभा में दुष्ट धृतराष्ट्र के पुत्रों ने मुझे बहुत कष्ट पहुँचाया, तब मेरे हृदय में सहसा क्रोध उत्पन्न हुआ; किन्तु कर्ण को देखते ही वह शांत हो गया॥39 1/2॥
 
With the help of Karna and Arjuna, I could have defeated even Devraja Indra. When the evil-minded sons of Dhritarashtra inflicted a lot of pain on me in the Kaurava Sabha, suddenly anger arose in my heart; but on seeing Karna, it became calm. ॥ 39 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)