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mahabharat 12.1.31-32h: तब कुन्ती ने चौड़ी छाती वाले कर्ण से पुनः कहा, 'पुत्र! तुम अर्जुन के साथ अपनी इच्छानुसार युद्ध करो; किन्तु अन्य चार भाइयों को सुरक्षा प्रदान करो।'   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  12.1.31-32h 
तमुवाच किल पृथा पुन: पृथुलवक्षसम्॥ ३१॥
चतुर्णामभयं देहि कामं युध्यस्व फाल्गुनम्।
 
 
अनुवाद
तब कुन्ती ने चौड़ी छाती वाले कर्ण से पुनः कहा, 'पुत्र! तुम अर्जुन के साथ अपनी इच्छानुसार युद्ध करो; किन्तु अन्य चार भाइयों को सुरक्षा प्रदान करो।'
 
Then Kunti said to the broad-chested Karna again, 'Son, fight with Arjuna as you wish; but give protection to the other four brothers.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)