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mahabharat 12.1.30-31h: उन्होंने कहा, "इसलिए मैं पहले युद्धभूमि में श्रीकृष्ण के साथ अर्जुन को परास्त करूँगा और फिर अपने पुत्र युधिष्ठिर के साथ संधि करूँगा।"   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  12.1.30-31h 
सोऽहं निर्जित्य समरे विजयं सहकेशवम्॥ ३०॥
संधास्ये धर्मपुत्रेण पश्चादिति च सोऽब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "इसलिए मैं पहले युद्धभूमि में श्रीकृष्ण के साथ अर्जुन को परास्त करूँगा और फिर अपने पुत्र युधिष्ठिर के साथ संधि करूँगा।"
 
"Therefore I will first defeat Arjuna along with Sri Krishna in the battle-field and then enter into a treaty with my son Yudhishthir," he said. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)