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mahabharat 12.1.29-30h: माता! यदि मैं आपकी सलाह मानकर अभी युधिष्ठिर से संधि कर लूँ तो सब यही सोचेंगे कि कर्ण युद्ध में अर्जुन से डर गया।   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  12.1.29-30h 
युधिष्ठिरेण संधिं हि यदि कुर्यां मते तव॥ २९॥
भीतो रणे श्वेतवाहादिति मां मंस्यते जन:।
 
 
अनुवाद
माता! यदि मैं आपकी सलाह मानकर अभी युधिष्ठिर से संधि कर लूँ तो सब यही सोचेंगे कि कर्ण युद्ध में अर्जुन से डर गया।
 
Mother! If as per your advice I enter into a treaty with Yudhishthira right now then everyone will think that Karna got scared of Arjuna in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)