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mahabharat 12.1.28-29h: हमने यह भी सुना है कि बाद में उन्होंने माता कुंती को उत्तर दिया कि 'मैं युद्ध के समय राजा दुर्योधन का परित्याग नहीं कर सकता; क्योंकि ऐसा करने से मेरी नीचता, क्रूरता और कृतघ्नता सिद्ध होगी।' 28 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  12.1.28-29h 
अपि पश्चादिदं मातर्यवोचदिति न: श्रुतम्।
न हि शक्ष्याम्यहं त्यक्तुं नृपं दुर्योधनं रणे॥ २८॥
अनार्यत्वं नृशंसत्वं कृतघ्नत्वं च मे भवेत्।
 
 
अनुवाद
हमने यह भी सुना है कि बाद में उन्होंने माता कुंती को उत्तर दिया कि 'मैं युद्ध के समय राजा दुर्योधन का परित्याग नहीं कर सकता; क्योंकि ऐसा करने से मेरी नीचता, क्रूरता और कृतघ्नता सिद्ध होगी।' 28 1/2
 
We have also heard that he later replied to mother Kunti that 'I cannot abandon King Duryodhana during the war; because doing so would prove my meanness, cruelty and ungratefulness.' 28 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)