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mahabharat 12.1.2: तत्पश्चात् वे महामनस्वी पाण्डव आत्मशुद्धि के लिए एक मास तक नगर के बाहर (गंगा के तट पर) रहे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.1.2 
तत्र ते सुमहात्मानो न्यवसन् पाण्डुनन्दना:।
शौचं निवर्तयिष्यन्तो मासमात्रं बहि: पुरात्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे महामनस्वी पाण्डव आत्मशुद्धि के लिए एक मास तक नगर के बाहर (गंगा के तट पर) रहे॥2॥
 
After that, those great minded Pandavas stayed outside the city (on the banks of Ganga) for a month to perform self-purification. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)