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mahabharat 12.1.15: हे प्रभु! सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के प्रिय पुत्रों को मारकर प्राप्त की गई यह विजय मुझे पराजय के समान प्रतीत हो रही है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 1: युधिष्ठिरके पास नारद आदि महर्षियाेंका आगमन और युधिष्ठिरका कर्णके साथ अपना सम्बन्ध बताते हुए कर्णको शाप मिलनेका वृत्तान्त पूछना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.1.15 
सौभद्रं द्रौपदेयांश्च घातयित्वा सुतान् प्रियान्।
जयोऽयमजयाकारो भगवन् प्रतिभाति मे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के प्रिय पुत्रों को मारकर प्राप्त की गई यह विजय मुझे पराजय के समान प्रतीत हो रही है॥15॥
 
O Lord! This victory obtained by killing Subhadra's son Abhimanyu and Draupadi's beloved sons seems like a defeat to me. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)